Dhammapada धम्मपद, Yamak Vaggo यमक वग्गो

मन ही प्रधान है (मट्ठकुण्डली की कथा)

श्रावस्ती में अदिन्न पूर्वक नामक एक महा कृपण ब्राह्मण को मट्ठकुण्डली नाम का इकलौता पुत्र था। सोलह वर्ष की आयु में मट्ठकुण्डली बीमार पड़ गया। अदिन्नपूर्वक ने धन बरबाद होने के डर से उसकी समुचित दावा न करायी। वह मरणासन्न व्यक्ति भगवान् को भिक्षाटन करते देख, उनपर मन को प्रसन्न करके मरकर तावतिंस नामक देवलोक… Continue reading मन ही प्रधान है (मट्ठकुण्डली की कथा)

Advertisements
Dhammapada धम्मपद, Yamak Vaggo यमक वग्गो

मन ही प्रधान है (mind is prime)

श्रावस्ती के जेतवन महाविहार में चक्खु पाल नामक एक अंधे अर्हत भिक्षु थे। प्रातःकाल उनके टहल्ते समय पैरों के नीचे दबकर बहुत सी बीरबहुटिया मर जाती थीं। एक दिन कुछ भिक्षुओं ने यह बात भगवान से कही। भगवान ने कहा - "भिक्षुओं! चक्खूपाल अर्हत भिक्षु है, अर्हत को जीवहिंसा करने की चेतना नहीं होती है।"… Continue reading मन ही प्रधान है (mind is prime)